Thursday, 31 July 2014

निजि शिक्षण संघ द्वारा अपनी संस्थाऐं बन्द कर कलेक्ट्रेट पर प्रर्दशन कर जिला उपखण्ड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन

हनुमानगढ- राजस्थान विद्यालय विधेयक 2013 समाप्त करने फिस निर्धारण समिति द्वारा 2012-13 के आधार पर निर्धारित फीस के आदेश निरस्त करने, निजि शिक्षण संस्थाओं को भी सरकार की तरह प्रति विधार्थी 14000 रुपये तक फीस वृद्धि करने की छुट देने, जिन संस्थाओं की फीस 14000 से अधिक है उनके आय-व्यय ध्यान में रखते हुए न्याय संगत फीस का निर्धारण करने और प्रत्येक जिले में फीस निर्र्धारण समिति का गठन करने आदि मांगों को लेकर निजि शिक्षण संघ द्वारा अपनी संस्थाऐं बन्द कर  कलेक्ट्रेट पर प्रर्दशन कर जिला उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। संघ के प्रान्तीय उपाध्यक्ष बाबुलाल जुनेजा ने बताया कि राजस्थान विद्यालय विधेयक 2012 के कारण उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करने वाली लगभग 37500 शिक्षण संस्थाओं का संचालन असंभव हो  गया है। 80 प्रतिशत निजि संस्थाऐ नाम मात्र की फीस लेकर उत्तम शिक्षा प्रदान कर गांव-गांव, ढाणी-ढाणी में शिक्षा का प्रचार-प्रसार कर रही है, और राज्य सरकार द्वारा इन्ही संस्थाओं को समाप्त करने का षडयंत्र किया जा रहा है। संस्थाओं की फीस संस्था पक्ष को सुने बिना निर्धारित की जा रही है। जो नियमों और न्याय के विरुध है उन्होने इसे तानाशाही और स्वेच्छाचारित बताया। जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा ने बताया कि हमारे द्वारा इस बारे में समिति के अध्यक्ष जस्टिस शिव कुमार शर्मा को अवगत करवाया गया और उन्हे बताया कि इस विदेह से भ्रष्टाचार बढेगा और फीस निर्धारण समिति भ्रष्टाचार का अड्डा बन जायेगी, जिसका ज्वलंत उदारण 24 जुलाई 2014 को समिति के कर्मचारी का रिश्वत लेते पकड़ा जाना है। संघ सदस्यों ने इस दमनकारी विधेयक को वापिस लेने की मांग की। इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष पवन शर्मा, महावीर शर्मा, मलकीत सिंह मान, विवेक भार्गव, राजेश कुमार मिढा सहित सैकड़ो की सख्या में संघ के सदस्य मौजुद थे।

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